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Patna : चारों तरफ फैला मटमैला पानी, डूबे हुए कच्चे मकान और जान बचाने के लिए पक्के घरों की छतों पर रात-दिन गुजारते लाचार लोग। सारण जिले के पानापुर प्रखंड में इस वक्त जिंदगी पानी के बीच ठहर सी गई है। चूल्हा बुझे दो दिन बीत चुके थे और घरों में रखा अनाज भी बाढ़ की भेंट चढ़ चुका था। ऐसे में गुरुवार की सुबह जब गड़गड़ाहट की आवाज के साथ आसमान में हेलीकॉप्टर दिखा, तो छतों पर बैठे बच्चों और बुजुर्गों के चेहरे पर राहत की चमक तैर गई। यह आवाज सिर्फ मशीन की नहीं, बल्कि उम्मीद की थी कि सरकार और प्रशासन उन्हें इस मुसीबत में भूला नहीं है।

स्टेट हैंगर पर मची रही हलचल, अफसर खुद कराते रहे लोडिंग
इस पूरी मुहिम की शुरुआत पटना के स्टेट हैंगर से हुई। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया। पटना के जिलाधिकारी खुद मौके पर खड़े होकर राशन के बोरों को हेलीकॉप्टर में भरवाते दिखे। पैकेट ठीक से बंधे हैं या नहीं, उनमें पानी से बचने का इंतजाम है या नहीं, इन छोटी-छोटी बातों की पड़ताल खुद अफसर कर रहे थे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल पल-पल की रिपोर्ट लेते रहे, जबकि संयुक्त सचिव अविनाश कुमार और इंजीनियर मो. आसिफ इकबाल रनवे पर मौजूद रहकर राहत सामग्री की पहली खेप को रवाना कराने में जुटे रहे।
अचानक बढ़ी मांग तो गोरखपुर से बुलाना पड़ा दूसरा चॉपर
जैसे ही पहला हेलीकॉप्टर पानापुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों के ऊपर पहुंचा, नीचे का मंजर देखकर साफ हो गया कि जरूरत उम्मीद से कहीं ज्यादा है। सारण जिला प्रशासन ने फौरन पटना संदेश भेजा कि पानी का घेरा बहुत बड़ा है और राशन के पैकेट्स की तादाद बढ़ानी होगी। खबर मिलते ही सरकार ने बिना वक्त गंवाए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक और हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर दी। कुछ ही घंटों में दूसरा चॉपर भी राहत अभियान में जुट गया, जिससे एक साथ कई दूर-दराज के टोलों तक राशन गिराना मुमकिन हो सका।
पानी में घिरे लोगों के हाथों में जब पहुंचे राहत के पैकेट
पानापुर के जो गांव पूरी तरह कट चुके हैं, जहां मोटरबोट का पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है, वहां हेलीकॉप्टर से चूड़ा, गुड़, सत्तू और जरूरी सामान के पैकेट सीधे गिराए गए। सूखी जमीन या छतों पर गिरते ही लोग दौड़कर इन पैकेट्स को संभालते दिखे। सरकार का संकल्प साफ है कि बाढ़ के इस मुश्किल दौर में किसी भी परिवार को भूखा सोने नहीं दिया जाएगा। जब तक बाढ़ का पानी उतर नहीं जाता और जनजीवन पटरी पर नहीं लौटता, तब तक आसमान से राहत का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।
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