अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : रांची का एक पढ़ा लिखा और जिम्मेदार नागरिक। रोजमर्रा की तरह सामान्य दिनचर्या चल रही थी। तभी एक फोन कॉल आया। दूसरी ओर से आवाज गंभीर थी, लहजा सख्त और बात कानून की। कॉल करने वाले ने खुद को ED का अधिकारी बताया। कुछ ही मिनटों में यह साधारण कॉल डर और तनाव में बदल गई। फोन करने वाले ने कहा कि पीड़ित का नाम एक गंभीर वित्तीय अपराध में सामने आया है। गिरफ्तारी तय है। घर, समाज और परिवार की इज्जत का हवाला दिया गया। कहा गया कि यह मामला गोपनीय है और किसी से बात करना मना है।
डर ने छीन ली सोचने की ताकत
इसके बाद वीडियो कॉल शुरू हुआ। स्क्रीन पर वर्दी जैसा माहौल, सरकारी भाषा और लगातार दबाव। पीड़ित को बताया गया कि वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ में है। अगर तुरंत सहयोग नहीं किया गया तो पुलिस कार्रवाई होगी। घबराया हुआ शख्स बार-बार खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन डर का दायरा बढ़ता गया। गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया। मानसिक दबाव इतना था कि सही गलत सोचने की गुंजाइश ही नहीं बची। कुछ ही घंटों में पीड़ित ने पंजाब नेशनल बैंक के बताए गए खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ठगी का एहसास और टूटता विश्वास
जब कॉल बंद हुई, तब जाकर पीड़ित को शक हुआ। न कोई आधिकारिक नोटिस, न कोई स्थानीय जांच। धीरे धीरे समझ आया कि वह एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। यह सिर्फ पैसे की ठगी नहीं थी, बल्कि भरोसे, आत्मविश्वास और मानसिक शांति पर हमला था।
जांच में सामने आया संगठित साइबर गिरोह
पीड़ित की शिकायत पर CID रांची के साइबर क्राइम थाना में मामला दर्ज किया गया। DSP नेहा बाला की देखरेख में तकनीकी जांच, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल सुरागों के आधार पर पुलिस एक संगठित गिरोह तक पहुंची। कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी योगेश सिंह सिसोदिया निकला, जिसे राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से मोबाइल फोन और अहम डिजिटल सामग्री बरामद की गई।
देशभर में फैला जाल
CID की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह की कुल 10 शिकायतें दर्ज हैं। हर मामले में तरीका एक जैसा था। खुद को केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताना, डिजिटल अरेस्ट की धमकी देना और डर के जरिए पैसे ऐंठना।
पुलिस की चेतावनी और आम लोगों के लिए सबक
साइबर सेल की डीएसपी नेहा बाला कहती हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे नहीं मांगती। डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इस तरह की कॉल आते ही तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें : सपनों की पूंजी पर डाका डालने वाला अब CID के शिकंजे में



