अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi/Ramgarh : अक्सर सरकारी और अर्ध-सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते कर्मचारियों की चप्पलें घिस जाती हैं। कभी क्वार्टर की छत टपक रही है तो अर्जी धूल फांक रही है, तो कभी प्रमोशन का कागज एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूम रहा है। लेकिन बुधवार का दिन CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के अरगड्डा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कुछ अलग और राहत भरा साबित हुआ। सुबह 11 बजे जैसे ही समाधान शिविर का दरवाजा खुला, दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी सीधे बातचीत में बदल गई।
अधिकारियों की पूरी टीम टेबल पर, सीधे हुई बात
आमतौर पर बड़े अफसरों से मिलने के लिए भी कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, लेकिन इस शिविर का नजारा बदला हुआ था। समाधान सेल के मुख्य प्रबंधक गौतम चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में प्रशासनिक तंत्र की पूरी टीम एक साथ मौजूद थी। स्टाफ ऑफिसर (एचआर) राजीव कुमार, मुख्य प्रबंधक तेजविंदर सिंह और नोडल अधिकारी ऋचा टाइटस समेत सिविल और कार्मिक विभाग के तमाम छोटे-बड़े अधिकारी खुद कागज लेकर बैठे थे। मकसद सिर्फ एक था कि कर्मचारी अपनी बात कहें और उसका समाधान तुरंत निकाला जाए।
क्वार्टर मरम्मत से लेकर प्रमोशन तक, मौके पर हुआ फैसला
CCL के शिविर में दोपहर तक कर्मचारियों की अच्छी-खासी भीड़ जुट चुकी थी। सबसे ज्यादा अर्ज़ियां जर्जर क्वार्टरों की मरम्मत, रुक-रुक कर अटकने वाले प्रमोशन और सर्विस बुक में दर्ज गलतियों को सुधारने से जुड़ी थीं। अफसरों ने किसी फाइल को अटकाने के बजाय मौके पर ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। कई कर्मचारियों को तो हाथों-हाथ उनकी समस्याओं का समाधान मिल गया, जिससे उनके चेहरों पर बरसों पुरानी चिंता की जगह मुस्कान दिखाई देने लगी। जिन मामलों में थोड़ी कानूनी या कागजी प्रक्रिया बाकी थी, उनके लिए एक तय सीमा बना दी गई ताकि काम पेंडिंग न रहे।
भरोसे और पारदर्शी माहौल की नई शुरुआत
चार बजे जब शिविर का समय खत्म हुआ, तब तक माहौल पूरी तरह बदल चुका था। कर्मचारियों का कहना था कि अगर इसी तरह अफसर सामने बैठकर बात सुनें तो आधी समस्याएं वैसे ही खत्म हो जाएं। CCL की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि जब मंशा साफ हो तो सालों पुराने उलझे मामले भी घंटों में सुलझ सकते हैं। इस शिविर से न सिर्फ कर्मचारियों की शिकायतें दूर हुईं, बल्कि प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच भरोसे की एक नई डोर भी मजबूत हुई है।
इसे भी पढ़ें : स्क्रीन के सामने चमकी आंखें, कीबोर्ड पर थिरकी उंगलियां… CCL के 26 बाबू बने ‘डिजिटल मास्टर’











