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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : आमतौर पर कोर्ट का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर और झिझक आ जाती है। लेकिन शनिवार को रामगढ़ व्यवहार न्यायालय परिसर का माहौल कुछ अलग था। यहां लोग अपने मामलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को समझने और कानून को करीब से जानने के लिए भी पहुंचे थे। मौका था राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत लगाए गए कानूनी जागरूकता स्टॉल का। इस स्टॉल ने कोर्ट परिसर को एक तरह से सीखने की जगह में बदल दिया, जहां हर उम्र के लोग रुककर जानकारी ले रहे थे और अपने सवालों के जवाब तलाश रहे थे।
जब कानून की बातें हुई आसान भाषा में
स्टॉल पर मौजूद अधिकारियों और अधिकार मित्रों ने लोगों से सीधे संवाद किया। किसी ने पूछा कि क्या गरीब व्यक्ति बिना पैसे के वकील कर सकता है, तो किसी ने घरेलू विवाद या जमीन के मामलों को लेकर जानकारी ली। लोगों को बताया गया कि सरकार की ओर से कई ऐसी सुविधाएं हैं, जिनके तहत जरूरतमंदों को मुफ्त में कानूनी सहायता मिलती है। खासकर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए यह व्यवस्था काफी मददगार है।
लोक अदालत से आसान हो रहा न्याय का रास्ता
अधिकारियों ने समझाया कि लोक अदालत का मकसद सिर्फ मामलों को निपटाना नहीं, बल्कि लोगों को जल्दी और सस्ता न्याय दिलाना है। यहां मामलों का समाधान आपसी सहमति से होता है, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है। कई लोगों ने यह भी जाना कि उनके पुराने या लंबित मामलों को लोक अदालत के जरिए जल्दी सुलझाया जा सकता है।
एक बातचीत ने बदली सोच
स्टॉल पर आए कुछ लोगों के चेहरे पर शुरुआत में झिझक थी, लेकिन बातचीत के बाद उनमें आत्मविश्वास नजर आया। एक बुजुर्ग ने कहा कि उन्हें पहले लगता था कि कोर्ट के चक्कर लगाना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन आज उन्हें पता चला कि सरकार उनकी मदद के लिए भी खड़ी है। युवाओं और महिलाओं ने भी खुलकर सवाल पूछे और अपनी समस्याओं के समाधान के रास्ते समझे।
टीम की सक्रिय भागीदारी से बना असर
इस पहल को सफल बनाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अनिल कुमार, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के चीफ सुजित कुमार सिंह और सहायक मोहन महतो समेत पूरी टीम सक्रिय रही। वहीं अधिकार मित्र के रूप में विनोद कुमार महतो, संगीता महतो, अजय कुमार प्रजापति, अविनाश कुमार, आजाद कुमार और किशोर कुमार मुंडा ने लोगों को सरल तरीके से समझाकर इस अभियान को जमीन तक पहुंचाया।
भरोसा बढ़ा, दूरी घटी
इस पूरे आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि लोगों और न्याय व्यवस्था के बीच की दूरी थोड़ी कम होती नजर आई। जहां पहले कोर्ट को लेकर डर था, वहीं अब लोगों में समझ और भरोसा बढ़ता दिखा।
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