अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : उत्तर बिहार में उफान पर आई नदियों और बाढ़ की विभीषिका के बीच सरकार ने राहत का बड़ा ऐलान किया है। सीएम सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण और सारण जिले के जलमग्न इलाकों का सघन हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद वे सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और बैरिया प्रखंड के बथना स्थित राहत शिविर में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है कि बाढ़ की मार झेल रहे सभी परिवारों की पहचान करके दशहरा पर्व से पहले उनके बैंक खातों में सात-सात हजार रुपए की अनुग्रह राशि भेज दी जाए। राज्य सरकार इससे पहले भी बाढ़ पीड़ितों को डीबीटी के जरिए यह सहायता दे चुकी है।
राहत शिविर में खुद खाना परोसा, बच्चों और महिलाओं से पूछा हाल
हवाई सर्वेक्षण के बाद सीएम का काफिला सीधे बथना के पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में बने राहत शिविर में पहुंचा। यहां पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने सीधे राहत कार्यों का जायजा लेना शुरू किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई में जाकर भोजन की गुणवत्ता देखी और खुद करछुल थामकर कतार में बैठे बाढ़ पीड़ितों की थाली में खाना परोसा। मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं से सीधे बातचीत की और पूछा कि उन्हें खाने, पीने के पानी और रहने में कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है। उन्होंने साफ कहा कि लोग अपनी समस्याएं सीधे जनप्रतिनिधियों और अफसरों को बताएं, ताकि मौके पर ही उसका समाधान हो सके।
इसके बाद वे शिविर के भीतर चल रहे अस्थाई आंगनबाड़ी बाल केंद्र पहुंचे। वहां उन्होंने बच्चों से दुलार से बात की, उनकी पढ़ाई-लिखाई और खिलौनों की व्यवस्था देखी। मुख्यमंत्री ने शिविर में लगे मेडिकल कैंप का भी निरीक्षण किया। डॉक्टरों से पूछा कि जरूरी दवाइयों और एंटी-स्नेक वेनम का स्टॉक पर्याप्त है या नहीं। उन्होंने पशुओं के लिए बने अलग शेड और चारे के इंतजाम को भी देखा और अफसरों को ताकीद की कि इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के इलाज और चारे में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नेपाल से भारी पानी आने से बिगड़े हालात, दो से तीन दिन में मिलेगी राहत
राहत शिविर के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसर में बने जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने नक्शे के जरिए जिले में जलभराव की स्थिति, तटबंधों की मजबूती, चलाए जा रहे राहत कार्यों और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की तैनाती का ब्योरा दिया। वहीं जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि इस बार नेपाल की तराई से अप्रत्याशित पानी छोड़ा गया, जिसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बगहा, रेवा घाट, लालगंज और गोपालगंज में जलस्तर अपने उच्चतम स्तर यानी एचएफएल पर पहुंच गया है। हालांकि गंगा नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, लेकिन अब पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है और डुमरिया पुल के पास भी नदी का दबाव घटा है।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि नेपाल से अचानक आए भारी पानी की वजह से हालात इतने गंभीर बने हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो से तीन दिनों में प्रभावित गांवों से पानी पूरी तरह निकल जाने की उम्मीद है। बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोसी और महानंदा नदी का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे कराया जा रहा है, ताकि हर साल आने वाली इस तबाही से लोगों को हमेशा के लिए निजात दिलाई जा सके।

जब तक आखिरी आदमी घर न लौट जाए, तब तक चूल्हा जलता रहेगा
सीएम सम्राट चौधरी ने अफसरों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि नियमों और तय एसओपी के मुताबिक हर पीड़ित तक तुरंत मदद पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि पानी की त्वरित निकासी के लिए जहां जरूरत हो, वहां तुरंत स्लुइस गेट खोले जाएं। नदियों के जलस्तर, संवेदनशील तटबंधों और कटाव वाले इलाकों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जाए। नावों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए और सूखा राशन लगातार बंटना चाहिए।
सीएम ने स्पष्ट किया कि जब तक पानी पूरी तरह सूख नहीं जाता और आखिरी व्यक्ति सुरक्षित अपने घर वापस नहीं लौट जाता, तब तक राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई का संचालन लगातार जारी रहेगा। इस उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद डॉ. संजय जायसवाल, सांसद सुनील कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी प्रीता वर्मा, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसे भी पढ़ें : पटना और गया जी बनेंगे स्वच्छता के मॉडल, केंद्र के PRAGATI-50 में मिली जगह



