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Home » 9 साल में बदली यूपी की सेहत, गांव-गांव पहुंचा इलाज का मजबूत नेटवर्क
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9 साल में बदली यूपी की सेहत, गांव-गांव पहुंचा इलाज का मजबूत नेटवर्क

March 24, 2026No Comments5 Mins Read
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इलाज
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Lucknow (UP) : उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कभी अव्यवस्था, भीड़ और संसाधनों की कमी के लिए जानी जाती थी। सरकारी अस्पतालों में इलाज मिलना चुनौती होता था और गांव के लोगों को छोटी-छोटी जांच के लिए भी शहर भागना पड़ता था। लेकिन पिछले नौ वर्षों में तस्वीर काफी बदली है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सिर्फ बढ़ाया ही नहीं, बल्कि उसे जमीन तक पहुंचाने की कोशिश की। यही वजह है कि अब इलाज का दायरा गांव से लेकर बड़े शहरों तक फैलता दिख रहा है।

डिजिटल हेल्थ से बदली इलाज की दिशा

अब इलाज सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं रह गया है। यूपी में 5.76 करोड़ से ज्यादा लोगों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड बनाए जा चुके हैं। इसका मतलब यह है कि मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास अब डिजिटल रूप में उपलब्ध है। डॉक्टरों के लिए भी यह काम आसान हुआ है। मरीज कहीं भी इलाज कराए, उसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है। माइक्रोसाइट प्रोजेक्ट के तहत लाखों रिकॉर्ड रजिस्टर किए गए हैं, जिससे डेटा मैनेजमेंट मजबूत हुआ है। साथ ही, यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल ने बीमारियों पर नजर रखना आसान बना दिया है। अब बीमारी फैलने से पहले ही अलर्ट मिल जाता है और समय पर कार्रवाई हो पाती है।

मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर खास नजर

स्वास्थ्य सुधार की असली तस्वीर तब दिखती है जब सबसे कमजोर वर्ग तक सुविधा पहुंचे। इस दिशा में सरकार ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य पर खास फोकस किया। गर्भवती महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड के लिए ई-वाउचर दिया जा रहा है। जननी सुरक्षा योजना के तहत लाखों महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिली है। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों का इलाज तेजी से हुआ है। वहीं दस्तक अभियान ने एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ गांव-गांव जाकर काम किया है। इन प्रयासों का असर यह है कि अब जागरूकता भी बढ़ी है और समय पर इलाज भी मिल रहा है।

आयुष्मान योजना ने बदली गरीबों की जिंदगी

बीमारी का सबसे बड़ा डर इलाज का खर्च होता है। इस डर को कम करने के लिए आयुष्मान भारत योजना ने बड़ा काम किया है। प्रदेश में करोड़ों लोगों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज कवर मिला है। लाखों परिवार इस योजना से जुड़े हैं और हजारों अस्पताल इसमें शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान ने भी उन परिवारों को कवर दिया, जो पहले किसी योजना में शामिल नहीं थे। अब गरीब परिवारों के लिए इलाज बोझ नहीं, बल्कि एक अधिकार बनता दिख रहा है।

एम्बुलेंस और मोबाइल यूनिट से घर तक पहुंचा इलाज

आपात स्थिति में समय ही सबसे बड़ी चीज होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत किया गया। 108 सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद मिली है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे गंभीर मरीजों को रास्ते में ही बेहतर इलाज मिल सके। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स ने दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए राहत दी है। इन यूनिट्स ने करोड़ों मरीजों का इलाज किया है। जहां अस्पताल नहीं पहुंच पाते थे, वहां अब इलाज खुद पहुंच रहा है।

हर जिले में जांच और डायलिसिस की सुविधा

पहले डायलिसिस या सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं बड़े शहरों तक सीमित थीं। अब प्रदेश के सभी जिलों में मुफ्त डायलिसिस सुविधा उपलब्ध है। लाखों मरीज इससे लाभान्वित हुए हैं। सीटी स्कैन सेवाएं भी जिला स्तर तक पहुंच चुकी हैं। टेलीमेडिसिन ने एक और बड़ी समस्या का समाधान किया है। अब गांव में बैठा मरीज भी बड़े डॉक्टर से सलाह ले सकता है। इससे समय और पैसा दोनों की बचत हो रही है।

दवाओं से लेकर जांच तक सिस्टम में पारदर्शिता

सरकार ने सिर्फ सुविधाएं बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सिस्टम को भी बेहतर बनाने पर काम किया है। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन के जरिए दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई पर नजर रखी जा रही है। कई स्वास्थ्य इकाइयों को गुणवत्ता प्रमाण पत्र मिला है, जिससे सेवाओं पर भरोसा बढ़ा है। खाद्य सुरक्षा के लिए मोबाइल लैब और आधुनिक जांच केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, ताकि लोगों को सुरक्षित भोजन मिल सके।

अब ब्लॉक स्तर पर बनेगा नया हेल्थ मॉडल

स्वास्थ्य सेवाओं को और करीब लाने के लिए अब ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। 142 यूनिट बनाई जाएंगी, जहां रजिस्ट्रेशन, जांच और प्राथमिक इलाज एक ही जगह मिलेगा। इसका सीधा फायदा गांव और छोटे कस्बों के लोगों को होगा। उन्हें जिला अस्पताल जाने की जरूरत कम पड़ेगी। इन यूनिट्स को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि भविष्य की जरूरतों को भी पूरा किया जा सके।

बदलती तस्वीर, बढ़ता भरोसा

अगर इन नौ सालों के बदलाव को एक नजर में देखें, तो साफ दिखता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सिर्फ विस्तार नहीं हुआ, बल्कि उसका स्वरूप भी बदला है। अब इलाज शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव तक पहुंच रहा है। डिजिटल सिस्टम से लेकर एम्बुलेंस और बीमा योजनाओं तक, हर स्तर पर काम हुआ है। सबसे अहम बात यह है कि लोगों का भरोसा बढ़ा है। पहले जहां सरकारी अस्पताल आखिरी विकल्प होते थे, वहीं अब कई जगहों पर यही पहली पसंद बनते जा रहे हैं। यही बदलाव इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा संकेत है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब धीरे-धीरे लोगों के जीवन का मजबूत सहारा बन रही हैं।

इसे भी पढ़ें : DDC के ठिकानों पर निगरानी का छापा, कई ठिकानों पर एक साथ रेड

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