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New Delhi: देश की सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा को नई पहचान देने वाले बुनकरों और कारीगरों के लिए इस बार का राष्ट्रीय हथकरघा दिवस खास होने जा रहा है। 7 अगस्त को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हथकरघा क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले 22 विजेताओं को प्रतिष्ठित हथकरघा पुरस्कार-2025 से सम्मानित करेंगी। इस समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, मास्टर बुनकर, डिजाइनर, निर्यातक, कारीगर और देशभर से आए कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे। वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक इस वर्ष कुल 22 पुरस्कार दिए जाएंगे। इनमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों के जरिए उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने भारत की पारंपरिक हथकरघा कला को बचाने, आगे बढ़ाने, नए डिजाइन विकसित करने और दुनिया भर में इसकी पहचान मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
देश का सबसे बड़ा सम्मान है संत कबीर हथकरघा पुरस्कार
संत कबीर हथकरघा पुरस्कार को हथकरघा बुनकरों के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यह उन कारीगरों को दिया जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन पारंपरिक बुनाई कला को समर्पित कर दिया और अपनी कला से इस विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाया।इस सम्मान के तहत पुरस्कार विजेता को सोने का सिक्का, ताम्रपत्र, शॉल और प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है। यह सम्मान न केवल उनकी कला की पहचान है, बल्कि उनके वर्षों की मेहनत और समर्पण का भी सम्मान है।
रचनात्मकता और नवाचार को मिलेगा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार
राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन बुनकरों, डिजाइनरों और संस्थानों को दिया जाता है जिन्होंने उत्कृष्ट शिल्प कौशल, बेहतर गुणवत्ता, नए डिजाइन और उत्पादों में नवाचार के जरिए हथकरघा क्षेत्र को नई दिशा दी है। इस पुरस्कार में ताम्रपत्र, शॉल और प्रमाण-पत्र दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ना और कारीगरों को नए उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उत्कृष्ट काम करने वालों को मिलता है सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान
ये सभी पुरस्कार राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के तहत संचालित हथकरघा विपणन सहायता (एचएमए) घटक के अंतर्गत दिए जाते हैं। हथकरघा क्षेत्र में इन्हें उत्कृष्टता का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है। सरकार का मानना है कि ऐसे पुरस्कार कारीगरों को बेहतर काम करने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही आधुनिक तकनीक अपनाने, नए उत्पाद तैयार करने, बाजार का विस्तार करने, स्टार्ट-अप शुरू करने और उत्पादक कंपनियों को बढ़ावा देने में भी मदद मिलती है।
चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
वस्त्र मंत्रालय ने बताया कि पुरस्कार विजेताओं का चयन कई स्तरों पर की जाने वाली पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया जाता है। बुनाई श्रेणी के नामांकनों का मूल्यांकन पहले जोनल स्तर, फिर मुख्यालय स्तर और उसके बाद केंद्रीय चयन समिति करती है। वहीं डिजाइन विकास, विपणन, स्टार्ट-अप और उत्पादक कंपनियों से जुड़ी श्रेणियों के लिए विशेषज्ञ समितियां नामों की समीक्षा करती हैं। उनकी सिफारिश के बाद अंतिम चयन किया जाता है। मंत्रालय का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का मकसद वास्तविक प्रतिभाओं को निष्पक्ष तरीके से सम्मानित करना है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया सम्मान
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उन लाखों बुनकर परिवारों के सम्मान का अवसर भी है, जो पीढ़ियों से भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। इन पुरस्कारों के जरिए सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक बुनाई कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, कारीगरों को बेहतर बाजार मिले और भारतीय हथकरघा उत्पादों की पहचान देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में और मजबूत हो।
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