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Godda : सुंदर पहाड़ी के एक छोटे से गांव में रहने वाले रामू (बदला हुआ नाम) के लिए टीबी की बीमारी सिर्फ दवा का नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का भी संघर्ष बन गई थी। दवा तो मिल रही थी, लेकिन कमजोरी और सही खानपान की कमी इलाज की राह को मुश्किल बना रही थी। ऐसे में जब उसके हाथ में पोषण किट पहुंची, तो उसे सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक भरोसा मिला कि अब वह जल्दी ठीक हो सकता है। विश्व टीबी दिवस पर गोड्डा से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन दर्जनों मरीजों की है, जिनकी जिंदगी में “निश्चय मित्र” पहल ने नई उम्मीद जगाई है।
पोषण बना इलाज का साथी
टीबी के इलाज में दवा के साथ पोषण की अहम भूमिका होती है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में कई मरीज ऐसे हैं, जिनके लिए संतुलित आहार जुटाना आसान नहीं होता। यहीं पर जितपुर खनन परियोजना की सीएसआर टीम आगे आई और सुंदर पहाड़ी प्रखंड के 10 गांवों में 86 मरीजों तक पोषण किट पहुंचाई। इन किटों में ऐसी जरूरी चीजें शामिल हैं, जो मरीजों की ताकत बढ़ाने में मदद करती हैं। नतीजा यह हुआ कि कई मरीजों की हालत में तेजी से सुधार देखने को मिला।

सम्मान के पीछे छुपी है मेहनत की कहानी
विश्व टीबी दिवस के मौके पर इस काम को जिला और राज्य दोनों स्तर पर सम्मान मिला। गोड्डा में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त अंजली यादव ने टीम के प्रयासों को सराहा और इसे मरीजों के लिए संजीवनी बताया। वहीं रांची में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी इस पहल की तारीफ की। यह सम्मान सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस मेहनत और संवेदनशीलता की पहचान है, जो टीम ने जमीन पर दिखायी।
‘निश्चय मित्र’ बना भरोसे का नाम
“निश्चय मित्र” योजना के तहत समाज के लोग और संस्थाएं टीबी मरीजों की मदद के लिए आगे आते हैं। जितपुर खनन परियोजना की टीम ने इस जिम्मेदारी को सिर्फ एक औपचारिकता नहीं माना, बल्कि इसे मिशन की तरह लिया। टीम के सदस्य गांव-गांव जाकर मरीजों से मिलते हैं, उनकी जरूरत समझते हैं और फिर मदद पहुंचाते हैं। यही वजह है कि यह पहल लोगों के बीच भरोसे का नाम बनती जा रही है।

इलाज से आगे की सोच
यह पहल सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं है। यह उस सोच को भी बदल रही है, जिसमें टीबी को लेकर डर और सामाजिक दूरी बनी रहती है। जब मरीजों को सहारा मिलता है, तो वे खुलकर इलाज कराते हैं और जल्दी ठीक भी होते हैं। देश ने टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया है। इसे हासिल करने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास काफी नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है।

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